भक्ति सागर

श्री राम कथा प्रथम दिवस {महात्म्य}भाग 1

 तो चतलए राम भक्तों ज्यादा समय न व्यथा करते हुए आपको राम कथा की और ले चलते हैं ,मानस का एक न्याय कहता है की तकसी से भी प्रेम स्थातपत करना हो तो तो उसको पहले जानना आवश्यक है क्यों जब सामने वाले पर आपका विश्वाश नहीं होगा तब तक प्रेम होने वाला नहीं है ,और विश्वास  होने के लिए  उसको जानना आवश्यक है,बाबा कहते हैं मानस में जाने दिनु न होई परतीति,बिनु परतीति होई न प्रीती

जब तक जानेगे नहीं तब तक परतीति  यानि विश्वास नहीं होगा और जब तक विश्वास  नहीं होगा प्रेम होने वाला नहीं है तो जानेगे कैसे महापुरुषों ने जानने के लिए इस मानस के माध्यम से गया सुनाया और समझाया ,वेदों के हिसाब  से मानें तो इस मानस की कथा चार स्थानों पर सुनाई गयी है सबसे प्रथम स्थान है काशी का अस्सी घाट काशी तो आप लोग जानते होंगे ये वही मोक्ष दायिनी काशी है जो  भगवान शिव  के त्रिशूल  पर स्थित  नगरी है इस स्थान पर वक्ता के रूप में स्वयं पूज्यपाद श्री तुलसीदास जी बैठे हैं श्रोता के रूप में संतों का समाज है अथवा गंगा मैया हैं और गोस्वामी जी कहते हैं स्वान्तः सुखाय तुलसी अथाात तुलसी दास जी का स्वयं अपना मन है,इस घाट का नाम है शरणागति घाट  मानस के पहले वक्ता गोस्वा,मी तुलसी दास जी कहते हैं मै आप लोगों को वह कथा सुनाऊंगा जो की प्रयागराज में याग्यवल्क्य ऋषि  ने भरद्वाज को सुनाई थी ,अब दुसरे कथा वाचक श्री याज्ञवल्क्य ऋषि और श्रोता हैं श्री भरद्वाज जी और स्थान है श्री तीथाराज प्रयाग और उस घाट  का नाम है कर्मकांड घाट ,याग्यवलक्य ऋषि जी  कहते है श्री भरद्वाज ऋषि से ऋषिवर मै  आपको वो कथा सुनाऊंगा जो की कैलाश पर्वत  पर बैठ कर भुत भावन भगवान श्री शिव व ने माता पावाती को सुनाई थी,अब तीसरे कथा वाचक श्री भगवान शिव हैंऔर श्रोता के रूप में माता पार्वती जी विराजमान हैं ,और स्थान है कैलाश पर्वत नाम है ग्यांन घाट बाबा शिव कहते हैं माता पार्वती से  कहते हैं माता पावाती से की है देवी मैं आपको वह कथा सुनाने जा रहा हूँ जिस  कथा को मैंने श्री काग भुसुण्डी जी के मुख से सुनी थी .

और उस स्थान पर वक्ता हैं काग भुशुण्डी जी महाराज और  श्रोता के रूप में बहुत सारे पक्षी हैं परंतु मुख्य श्रोता  के रूप में पक्षियों  के राजा भगवान श्री विष्णु जी  के वाहन गरुड़ भगवान जी हैं और स्थान है हिमालय का निलगिरी पर्वत और घाट का नाम मानसकार भक्ति घाट इन चरों स्थानों पर कथा प्रारम्भ करने से पूर्व वक्ताओं ने कथा की महिमा गाई हैं

                                                          भजन

इसे श्रवण कर मिट  जाती है जन्म जन्म की व्यथा हो जय-जय राम कथा हो जय-जय राम कथा |

कथा श्रवण कर मिट  जाती है इसे श्रवण कर मिट जाती है सौ जन्म जन्म की व्यथा हो जय जय राम कथा जय जय राम कथा राम कथा की जय श्री राम कथा ||

इसे श्रवण कर मिट  जाती है जन्म जन्म की व्यथा हो जय-जय राम कथा हो जय-जय राम कथा |

कथा श्रवण कर मिट जाती है इसे श्रवण कर तमि जाती है सौ जन्म जन्म की व्यथा ||

जय जय राम कथा जय जय राम कथा राम कथा की जय श्री राम कथा ||

रामकथा कलि  कामद गाई  ,सुजन सजीवनमुरी सुहाई

रामकथा कलि कामद गाई ,सुजन सजीवनमुरी सुहाई

बुध विश्राम सकल जन रंजन, रामकथा कलि कलुष विभंजन  

बुध विश्राम सकल जन रंजन, रामकथा कलि कलुष विभंजन  

तेरा परमारथ बन जाए मेंरा परमारथ बन जाए ,श्री नारद करी यथा

जय जय राम कथा जय जय राम कथा राम कथा की जय श्री राम कथा ||

इसे श्रवण कर मिट जाती है जन्म जन्म की व्यथा हो जय-जय राम कथा हो जय-जय राम कथा |

इसे श्रवण कर मिट जाती है जन्म जन्म की व्यथा हो जय-जय राम कथा हो जय-जय राम कथा |

कथा श्रवण कर मिट जाती है इसे श्रवण कर मिट जाती है सौ जन्म जन्म की व्यथा ||

दूसरे कथावाचक याज्ञवल्क्य ऋषि जी ने भारद्वाज को गाकर महिमा सुनाई

महामोह महिशेष  विशाला, रामकथा कलिका कराला

महामोह महिशेष  विशाला, रामकथा कलिका कराला

राम कथा शशि किरण समाना, संत चकोरी करहिं जेहिं पाना

राम कथा शशि किरण समाना, संत चकोरी करहिं जेहिं पाना

पीकर तू भी अमर हो जाए पीकर तू भी अमर हो जाए, गाकर तू भी अमर हो जाए

पीकर तू भी अमर हो जाए पीकर तू भी अमर हो जाए, गाकर तू भी अमर हो जाए

श्री हनुमंत यथा,जय-जय राम कथा हो जय-जय राम कथा |इसे श्रवण कर मिट जाती है जन्म जन्म की व्यथा हो जय-जय राम कथा हो जय-जय राम कथा |

यही है राम कथा यही है श्री राम कथा |

तीसरे वक्ता श्री शिवव जी माता पावाती जी को गाकर मानस की महिमा बता रहे हैं क्या कह रहे हैं जरा गौर से सुनिये भक्तों

राम कथा कलि विटप कुठारी ,सादर सुनु गिरिराज कुमारी

राम कथा सुंदर करतारी संसय विहंग उडावन हारी

राम कथा सुंदर करतारी संसय विहंग उडावन हारी

तेरा सब संसय भागेगा ,मेंरा सब संसय भागेगा ,पावाती कऋ यथा

इसे श्रवण कर मिट जाती है जन्म जन्म की व्यथा हो जय-जय राम कथा हो जय-जय राम कथा |

सभी वक्ताओं ने अपने अपने श्रोताओं को अपने अपने बुद्धि विवेक  के अनुसार कथा के महत्व को बताया  यह रामकथा किसी  के साथ भेदभाव नहीं करती है यह पीएचडी वाले को और कम पढ़े हुए व्यक्ति  को भी उतनी ही समझ में आती है जितनी  की एक बुद्धिमान व्यक्ति  समझता है गोस्वामी तुलसीदास जी राम चरित मानस  की रचना संस्कृत में करना चाहते थे जब वो संस्कृत में दिन भर लिखते और रात को विश्राम करने के लिए जाते अगले दिन आकर देखते तो पहले का सब लिखा हुआ मिट जाता था फिर तुलसी दास जी को बहुत ही ग्लानी हुई और भगवान शिव की उपासना किये,तत्पश्चात शिव जी के निर्देंसनुसार रामायण की रचना सरल अवधी भाषा में किये

Mishra Kuldeep

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