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FATF के फैसले के बाद इमरान खान पर विपक्ष का वार, “आवाम पस्त इमरान मस्त”

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इस समय कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, दरअसल एफएटीएफ (financial action task force,FATF) की निगरानी सूची से मुल्क को बाहर नहीं निकाल पाने की वजह से विरोधियों ने अपने सम्मानित पीएम इमरान खान को निशाने पर ले लिया है. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (Pakistan peoples party) ने इसे पाकिस्तान सरकार की असफलता बताया है. पीपीपी संसदीय दल की नेता शेरी रहमान ने कहा कि सरकार ने समय पर अपना होमवर्क नहीं किया जिसके वजह से पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की सूची से बाहर नहीं निकल पाया है. शेरी रहमान ने आगे बताया कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के सूत्र बताते हैं कि सरकार ने कानून का मसौदा सही ढंग से नहीं बनाया ।

इमरान खान की गलत नीतियों की वजह से विपक्ष घबराया हुआ है. विपक्षी महागठबंधन इस महीने गुजरांवाला एवं कराची में अपने बल का सफल परीक्षण कर चुका है. विपक्षियों का आरोप है कि, इमरान खान ने 2 साल पहले चुनाव में गड़बड़ी कर सत्ता हासिल कर ली थी. उल्लेखनीय है कि इमरान को सत्ता से बेदखल करने के लिए 11 दलों ने बीते 20 सितंबर को पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (PDM) नाम से संगठन बनाया था. गठबंधन में शामिल दल बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में इस महीने तीसरी बार रैली करने जा रहा है. इसी संगठन से जुड़े एक पदाधिकारी ने बताया कि पाकिस्तानी हुकूमत जनता के मुद्दों को गंभीरता से नहीं ले रही है पिछले दिनों पाकिस्तान में बाढ़ से भयंकर तबाही  आई थी. बाढ़ से पहले पाकिस्तानी हुकूमत अगर एक ढांचा बना कर कार्य की होती तो ऐसी नौबत नहीं आती. इमरान खान की गलत नीतियों की वजह से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था एकदम ध्वस्त है लेकिन हमारे वजीर-आला मस्त हैं. ।

शेरी रहमान ने कहा कि पाकिस्तानी हुकूमत गंभीरता से कोई कार्य नहीं किया नहीं तो यह नौबत नहीं आती. इमरान खान ने हमेशा विपक्ष विरोधी कहानी गढ़ कर पाकिस्तान की आवाम को बरगलाते रहे. इससे पहले एफएटीएफ के मसले पर पाकिस्तान के उद्योग मंत्री हम्माद अजहर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि FATF का फैसला पाकिस्तान हुकूमत की बड़ी डिप्लोमेटिक जीत है ।

क्या होता है FATF?

एफएटीएफ(financial action task force,FATF)  एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है,जो टेरर फंडिंग, मनी लांड्रिंग (money, Laundering) जैसे वित्तीय मामलों में दखल देते हुए तमाम देशों को गाइडलाइंस जारी करती है, और तंय करती है, कि वित्तीय अपराधों को बढ़ावा देने वाले देशों पर नकेल कसी जा सके । इसमें भी  अपराध के हिसाब से लिस्ट बनाने का प्रावधान है, जैसे कि ब्लैक लिस्ट ग्रे लिस्ट इत्यादि ।

Mishra Kuldeep

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